जीएसटी क्या है और इसके फायदे क्या हैं? | What is GST in Hindi

Goods and Services Tax – GST in Hindi

वस्तु एवं सेवा कर – जीएसटी क्या है?


जीएसटी एक अप्रत्यक्ष कर यानि indirect tax है जो भारत में 1st जुलाई 2017 से लागू होने जा रहा है। और जैसा की इसका नाम है यह वस्तुओं एवं सेवाओं दोनों पर लगेगा। # दुनिया के लगभग 160 देश पहले ही GST लागू कर चुके हैं। Goods & Services का क्या मतलब है? Goods यानि वो चीजें जिनका या तो हम प्रयोग कर सकते हैं या जिनका उपभोग कर सकते हैं…खा-पी सकते हैं. ये टैन्जिबल चीजें हैं जिन्हें हम छू सकते हैं… देख सकते हैं और इन्हें own कर सकते हैं।   जैसे कि –

  • किताबें
  • CDs
  • खाने-पीने की चीजें
  • फर्नीचर
  • Real Estate
  • Printers, computers and computer hardware
  • गाड़ियाँ
  • कपड़े

Services यानि हम किसी तरह की सेवा लेते हैं और उसके बदले में पैसे देते हैं। यह intangible in nature होती है, जैसे कि –

  • जब हम पार्लर में हेयर कट कराते हैं तो बिल में सर्विस टैक्स जुड़ा होता है.
  • होटल में खाना खाने पर भी हम सर्विस टैक्स अदा करते हैं.
  • किसी CA की सर्विस लेने पर या आर्किटेक्ट से घर बनवाने पर भी हम सर्विस टैक्स देते हैं.

यहाँ होता क्या है कि जो सर्विस प्रोवाइडर है वो अपनी सर्विसेस के लिए हमसे पैसे लेता है उसी में से सरकार के खाते में सर्विस टैक्स जमा करता है. ये indirect tax क्या होता है? दो तरह के टैक्स होते हैं डायरेक्ट एंड इनडायरेक्ट. डायरेक्ट टैक्स का उदाहरण एक नौकरीपेशा व्यक्ति द्वारा सरकार को दिए जाने वाला इनकम टैक्स है। जब हम कोई सामान लेते हैं तो उसपर लिखी MRP के हिसाब से पैसे दे देते हैं. पर अगर हम ध्यान दें तो MRP के बगल में लिखा होता है (Inclusive of all taxes) यानि उस मूल्य में टैक्स भी जुड़ा होता है जो सरकार को जाता है. इसका मतलब इस मामले में भी हम टैक्स देते हैं पर indirectly, इसलिए ये एक तरह का indirect tax है।

GST के बाद क्या महंगा क्या सस्ता? इस इमेज में देखें


GST के बारे में कुछ ज़रूरी बातें:

भारत की अप्रत्यक्ष कर संरचना ( Indirect Tax Structure) में सुधार करने हेतु  GST का लाना एक  बहुत बड़ा कदम माना जा रहा है।

जीएसटी एक उपभोग आधारित कर है अर्थात यह कर उस राज्य के द्वारा वसूल किया जाएगा जहा वस्तुओंं एवं सेवाओं का उपभोग किया जाएगा ना कि उस राज्य के द्वारा जहा यह वस्तुए एवं सेवाए निर्मित होंगी। जीएसटी के अंतर्गत अलग-अलग वस्तुओंं एवं सेवाओं पर अलग-अलग दर लागू होंगी। जीएसटी की दरें निर्धारित कर दी गयी हैं।

मूल तौर पर सभी वस्तुओं एवं सेवाओं पर-

  • 0%
  • 5%
  • 12%
  • 18% एवं
  • 28%

की दर से जीएसटी लगायी जाएगी। विशेष रूप से वैभव की वस्तुओं (luxury items) पर 28% की दर apply होगी। कुछ वस्तुएं ऐसी भी हैं जो जीएसटी के कर्यक्षेत्र से बाहर रखी गयी हैं। ऐसी वस्तुओं में मुख्य तौर पर –

  • शराब
  • पांच पेट्रोलियम सामग्री जैसे- कच्चा तेल (crude oil), पेट्रोल, डीज़ल, विमानन टरबाइन ईंधन (aviation turbine fuel) एवं प्राकृतिक गैस आदि सम्मिलित है।

ये कर हो जायेंगे गायब

जीएसटी (GST) के लागू हो जाने पर सभी वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी ही लगेगी अर्थात ज्यादातर अन्य सभी अप्रत्यक्ष करो को कर संरचना से हटा दिया जाएगा। जीएसटी के आने से समाप्त होने वाली राज्य स्तरीय (State level) एवं केंद्र स्तरीय (Central level) टैक्सेज की सूचि कुछ इस प्रकार है:

राज्य स्तरीय कर:

  • वैट (VAT)
  • सेंट्रल सेल्स टैक्स (Central Sales Tax)
  • एंट्री टैक्स एवं ओक्ट्रोई (Entry tax & Octroi)
  • इंटरटेनमेंट टैक्स (Entertainment Tax)
  • टैक्सेज आँन लाटरी, बेटिंग, गम्ब्लिंग (Taxes on lottery, betting, gambling)
  • स्टेट सेस एवं सरचार्ज (State Cess and Surcharge)

केंद्र स्तरीय कर:

  • सर्विस टैक्स (Service Tax)
  • सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी (Central Excise Duty)
  • एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (Additional Excise Duty)
  • एडिशनल ड्यूटी ऑफ़ कस्टम (Additional Duty of Custom)
  • सेंट्रल सेस एवं सरचार्ज (Central Cess and Surcharge)

चूँकि भारत में कर वसूल करने का अधिकार राज्य सरकार एवं केंद्रीय सरकार दोनों को है, जीएसटी को तीन भागो में विभाजित किया गया है: १) स्टेट जीएसटी (State GST) २)सेंट्रल जीएसटी (Central GST) एवं ३) इंटीग्रेटेड जीएसटी (Integrated GST)

  • राज्यान्तर्गत (Intra-State )  एक ही राज्य के अन्दर खरीद-बिक्री पर स्टेट जीएसटी एवं सेंट्रल जीएसटी दोनों लागू होंगे जिसे राज्य सरकार एवं केंद्रीय सरकार दोनों एक निर्धारित अनुपात में वसूल करेंगे।
  • अंतर-राज्यीय (Inter-State)  दो या दो से अधिक राज्यों के बीचखरीद एवं बिक्री पर इंटीग्रेटेड जीएसटी लगेगा जो केंद्र सरकार द्वारा वसूल किया जाएगा।

जीएसटी के लाभ – Benefits of GST in India:

भारत की वर्तमान कर-संरचना (Tax Structure) अत्यंत जटिल है। राज्य सरकर एवं केंद्रीय सरकार दोनों के द्वारा कर वसूले जाने की वजह से भारत में अलग-अलग प्रकार के कई कर मौजूद हैं। अलग-अलग करो की मौजूदगी के कारण व्यवसायियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Service Tax) के आ जाने से इन समस्याओं का काफी हद तक समाधान हो जाएगा। वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Service Tax) के लागू होने से सरकार एवं साधारण जनता दोनों का फ़ायदा होगा। जीएसटी को लागू करने के पीछे का उद्देश्य इन समस्त लाभों को अर्जित करना है:

1. व्यापार करने में आसानी –

जीएसटी के आ जाने से ज्यादातर सभी अप्रत्यक्ष कर समाप्त हो जाएँगे जिसकी वजह से व्यवसायियों को अब न तो अलग-अलग प्रकार के कर देने पड़ेंगे और ना ही विभिन्न प्रकार के कर विवरणी (Tax Returns) का सामना करना पड़ेगा। अब सभी व्यवसायी केवल एक अप्रत्यक्ष कर, GST Registration लेकर जीएसटी, का भुगतान करेंगे एवं केवल एक प्रकार का कर विवरणी, जीएसटीआर (GSTR), जमा करेंगे।

2. टैक्स पर टैक्स व्यवस्था की समाप्ति

वर्तमान समय में उत्पाद कर (Excise Duty) एवं सेवा कर (Service Tax) केंद्रीय सरकार के द्वारा संग्रह किया जाता है और वैट (VAT) एवं सेल्स टैक्स (Sales Tax) राज्य सरकार के द्वारा। जिस वजह से केंद्रीय सरकार को दिये जाने वाले करो का क्रेडिट (Input Tax Credit), राज्य सरकार को दिए जाने वाले करो पर एवं राज्य सरकार को दिए जाने वाले करो का क्रेडिट (Input Tax Credit), केंद्रीय सरकार को दिए जाने वाले करो पर नहीं मिल पाता है। जिस वजह से करो पर कर लग जाते है। परंतु जीएसटी के आ जाने के बाद विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष करो के समाप्त हो जाने के कारण करो पर कर लगाने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।

3. कर के बोझ में कमी 

वस्तु एवं सेवा कर (Goods and Service Tax) के लागू हो जाने से ज्यादातर सभी प्रकार के अप्रत्यक्ष कर समाप्त हो जाएँगे और सभी को केवल एक कर, जीएसटी, देना पड़ेगा। इन बदलावों की वजह से कर के बोझ में कमी आएगी।

4. वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य में कमी 

अप्रत्यक्ष कर-संरचना (Tax Structure) में वदलाव एवं विभिन्न प्रकार के अप्रत्यक्ष करो के समाप्त हो जाने की वजह से वस्तुओं एवं सेवाओं पर कर पहले की तुलना में कम लगेगा जिससे वस्तुओं एवं सेवाओं के मूल्य में कमी आएगी।

5. टैक्स की चोरी में कमी

जीएसटी के अंतर्गत कोई भी विक्रेता इनपुट टैक्स क्रेडिट (ख़रीदे हुए सामान पर दिए गये कर का लाभ) तभी उठा सकता है जब वह व्यक्ति जिससे उसने सामान ख़रीदा है, सरकार को अपने हिस्से का कर अदा कर दे एवं उस खरीददार को जिसे वह सामान बेच रहा है इनवॉइस (Invoice) अदा कर दे। अतः यह प्रक्रिया एक श्रृंखला प्रणाली (Chain System) में काम करती है जिससे वर्तमान समय में होने वाली कर की चोरी के समाप्त हो जाने की काफी हद तक संभावना है।

6. सरकार के कर-आय में वृद्धि 

कर में होने वाली चोरी में कमी आने से केंद्र एवं राज्य सरकार दोनों को काफी फ़ायदा होगा। इसके अलावा अप्रत्यक्ष कर-संरचना (Tax Structure) में सुधार होने से कर-संरचना सरल बन जाएगी जिससे अधिक से अधिक लोग कर देंगे एवं इसकी वजह से सरकार के कर-आय में वृद्धि होगी, जिसका प्रयोग देश की प्रगति के लिए किया जा सकता है। कोई भी बदलाव चाहे वो हमारे भले के लिए ही क्यों न हो कष्टकारी लगता है। शुरू में GST की वजह से भी समस्याएं आएँगी लेकिन long term में हमे इसके कई फायदे मिल सकते हैं। कुल मिलाकर ये उम्मीद की जा सकती है कि जीएसटी के लागू हो जाने से भारत की अर्थव्यवस्था पर एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।

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