उदारता और संकीर्णता


🔴 राजा सत्यनारायणकी दो अलग अलग वाटिकामे एक विशेषवृक्ष था और राजा स्वयं अपने हाथो से उन वृक्षोंको जल देने जाते थेऔर उन्हे सींचते हमेशा हराभराबनाये रखते थे!
🔵 एक बारउन्हे अचानक लम्बीअवधी के लिये राज्य सेबहुत दुर जानापड़ा जाते जातेउन्होंने उन वृक्षोंकी जिम्मेदारी अपनीदो सन्तानों कोदी और उन्हेकहा की तुम दोनो काएक ही कार्यहै की तुम्हेइन वृक्षों कोअपनी जान से ज्यादा सम्भालकररखना है और याद रखनाकी इनकी हरियालीसमाप्त हो पाये अन्यथाकहर ढा जायेगासारा राज्य समाप्तसा होकर रह जायेगा !
🔴 एक वर्षके बाद राजापुनः अपने राज्यमे लोटे तो उन्होंने देखा की एक वृक्षतो हराभरा हैऔर दूसरा खड़ातो है पर पुरी तरहसे सूखा हुआथा!
🔵 राजा नेतत्काल दोनो संतानोंको बुलाया औरकहा क्यों रेतुमने इन्हे पानीनही दिया तो एक संतानने कहा हॆ आदरणीय पिताश्रीपानी तो हम दोनो नेही दिया पर इसने वृक्षकी जड़ को समाप्त करदिया हालाँकि इसनेकोई कमी रखी परन्तुये जड़ को बचापाया और वृक्षभीतर ही भीतर समाप्त होताचला गया और मैने इसेबहुत समझाया कीजड़ को बचा नही तोपुरा वृक्ष समाप्तहो जायेगा परन्तुइसने मेरी एक सुनीऔर अब पश्चातापकर रहा है पर अबबहुत देर हो चुकी है…!


🔴 पर जातेसमय मैने कहाथा की वृक्षको खुशहाल रखनाहै और फल प्राप्त करना है तो जड़का विशेष ध्यानरखना…!
🔵 हाँ पिताश्री, और आपके कथनानुसारऔर आपकी कृपासे मैने जड़को बचा लियाइसलिये ये वृक्षहराभरा है !
🌹👉 सारांश:-
🔴 ये सारीसृष्टि और मनुष्यकी सारी जिन्दगीएक वृक्ष कीतरह ही तो है औररामइस सॄष्टिके मूलतत्व हैऔर जिस जिस ने संकीर्णताऔर विकारों कीज्वाला से  “मूलको बचा लिया उसकेजीवन का वृक्षकभी नही सूखाऔर जिसने संकीर्णताकी चादर ओढ़ली एकदिन उसकासमूल विनाश होगया !
🔵 यहाँ दोचादर है एक उदारता कीदूसरी संकीर्णता कीजिसने उदारता कीचादर ओढ़ ली एकदिन उसकेलिये सारा जगतराममयहो गयावो हर जीव मे , सारीसृष्टि मे , कणकणमे अपनेआराध्यको देखता हैऔर उसके मानवजीवन का लक्ष्यहराभरा हो जाता है !

🔴 उदारता हीजीवन है और संकीर्णता ही मृत्युऔर उदारतापूर्वक अपनेआराध्य के मार्गपे चलते रहनाऔर एक दिन उस अवस्थाको पाने का प्रयास करनाकी हमें हर जीव औरकण कण मे अपने आराध्यदिखने लगे जैसेकी भक्त प्रहलादको सर्वत्र नारायणही दिखाई देतेथे और ये उज्जवल अवस्थासंकीर्णता से नहीउदारता से प्राप्तकी जा सकती है इसलियेजिन्दगी मे उदारवादिताके साथ आगे बढ़ना संकीर्णतासे नही क्योंकिसंकीर्ण एक दिन अशांति केगहरे अन्धकार मेलुप्त हो जाते है।

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