स्वामी राम तीर्थ के अनमोल वचन | Swami Rama Tirtha Sayings

  • जंज़ीरें, जंज़ीरें ही हैं, चाहे वे लोहे की हों या सोने की, वे समान रूप से तुम्हें ग़ुलाम बनाती हैं। – स्वामी रामतीर्थ
  • वही उन्नति करता है जो स्वयं अपने को उपदेश देता है। – स्वामी रामतीर्थ
  • केवल प्रकाश का अभाव ही अंधकार नहीं, प्रकाश की अति भी मनुष्य की आँखों के लिए अंधकार है। – स्वामी रामतीर्थ
  • त्याग निश्चय ही आपके बल को बढ़ा देता है, आपकी शक्तियों को कई गुना कर देता है, आपके पराक्रम को दृढ कर देता है, वही आपको ईश्वर बना देता है। वह आपकी चिंताएं और भय हर लेता है, आप निर्भय तथा आनंदमय हो जाते हैं। – स्वामी रामतीर्थ
  • सूरज और चांद को आप अपने जन्म के समय से ही देखते चले आ रहे हैं। फिर भी यह नहीं जान पाये कि काम कैसे करने चाहिए? – रामतीर्थ
  • कृत्रिम प्रेम बहुत दिनों तक चल नहीं पाता, स्‍वाभाविक प्रेम की नकल नहीं हो सकती। – स्‍वामी रामतीर्थ
  • जो मनुष्‍य अपने साथी से घृणा करता है, वह उसी मनुष्‍य के समान हत्‍यारा है, जिसने सचमुच हत्‍या की हो। – स्‍वामी रामतीर्थ



  • आलस्‍य मृत्‍यु के समान है, और केवल उद्यम ही आपका जीवन है। – स्‍वामी रामतीर्थ
  • सच्‍चा पड़ोसी वह नहीं जो तुम्‍हारे साथ, उसी मकान में रहता है, बल्‍ि‍क वह है जो तुम्‍हारे साथ उसी विचार स्‍तर पर रहता है। – स्‍वामी रामतीर्थ
  • जब तक तुम्‍हारें अन्‍दर दूसरों के, अवगुण ढुंढने या उनके दोष देखने, की आदत मौजूद है ईश्‍वर का साक्षात, करना अत्‍यंत कठिन है। – स्‍वामी रामतीर्थ
  • व्‍यक्ति को हानि, पीड़ा और चिंताएं, उसकी किसी आंतरिक दुर्बलता के कारण होती है, उस दुर्बलता को दूर करके कामयाबी मिल सकती है। – स्‍वामी रामतीर्थ
  • दुनियावी चीजों में सुख की तलाश, फिजूल होती है। आनन्‍द का ख़ज़ाना, तो कहीं हमारे भीतर ही है। – स्‍वामी रामतीर्थ

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