क्षमता के अनुरूप कार्य करें (Work According to Capacity)

सफलता (Success) या असफलता (Failure) बहुत कुछ योग्यता पर निर्भर करती है, किंतु आत्मविश्वास की कमी (Lack of confidence) के कारण आप अपनी योग्यताओं और क्षमताओं को पहचान ही नहीं पाते और अपने मन में ही यह सोच लेते है कि आपमें योग्यता की कमी है ।
ऐसे में सफलता (Success) मिलना मुश्किल हो जाता है, साथ ही कई बार ऐसा भी होता है कि आप अपनी क्षमता को न पहचानते हुए कोई ऐसा कार्य हाथ में ले बैठते है, जो आप नहीं कर सकते और जब असफलता मिलती है तो मन में कुंठा घर कर लेती है ।
यह एक सर्वमान्य सच है कि प्रत्येक व्यक्ति प्रत्येक कार्य नहीं कर सकता है, किंतु यह भी सच है हर व्यक्ति में कुछ न कुछ विशेषता भी जरूर होती है और यदि इन्ही विशेषताओं की ओर ध्यान दिया जाए तो सफलता प्राप्त की जा सकती है ।
अत: शांत व कुंठारहित  मन से अपनी योग्यताओं की एक सूची तैयार करें और फिर उन्हीं योग्यताओं के आधार पर अपने भविष्य की राह का चुनाव करें, क्योंकि छोटी – छोटी सफलताएँ भी व्यक्ति में आत्मविश्वास का संचार करती है ।
विफलता बस फिर से शुरू करने का अवसर है,
इस बार और अधिक समझदारी से ।
कहने का तात्पर्य यह है कि असफलता (Failure) से घबराना नहीं चाहिए क्योंकि मुश्किलें तो हर किसी की जिंदगी में आती है । इसलिए मुश्किलों से घबराएं नहीं बल्कि इनको Face करना सीखें ।
असफलता (Failure) बस आपकी सीमाओं को प्रतिबंधित करती है, जिससे आप निराश हो उठते है और आपका आत्मविश्वास (Self-confidence) डगमगा जाता है, ऐसे में आप भविष्य में कोई कार्य प्रारंभ करने से पहले ही हथियार डाल देते है ।
निराशा की यही भावना भविष्य को बर्बाद कर देती है । इसलिए आप अपनी असफलता को सकारात्मक (Positive) ढंग से ले अर्थात अपनी गलतियों से सबक लेकर दोबारा कार्य प्रारम्भ करें । निश्चय ही सफलता (Success) आप के हाथ लगेगी ।

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